सितंबर 20, 2010

कमल के फूल

फूल लाया हूँ कमल के ।
क्या करूँ इनका ?
पसारें आप आँचल,
छोड़ दूँ,
हो जाए जी हल्का !

किन्तु क्या होगा कमल के फूल का ?

कुछ नहीं होता
किसी की भूल का-
मेरी कि तेरी हो-
ये कमल के फूल केवल भूल हैं ।

भूल से आँचल भरूँ ना
गोद में इनके सम्हाले
मैं वजन इनके मरूँ ना ।

ये कमल के फूल
लेकिन मानसर के हैं,
इन्हें हूँ बीच से लाया
ना समझो तरी पर के हैं ।

भूल भी यदि है
अछूती भूल है ?
मानसर वाले
कमल के फूल हैं । .........भवानीप्रसाद मिश्र

2 टिप्‍पणियां:

माधव ने कहा…

sundar

शरद कोकास ने कहा…

अच्छा लिख रहे हो भाई ।