जून 10, 2010

हमारी नयी ज़िंदगी

शबीह ने अभी बारहवीं की परीक्षा पास की है, कविताओं से इन का नाता खून पानी का है, नौ दस साल की होंगी तब से ही शबीह ने कविता के साथ उठना बैठना शुरू कर दिया था, छोटी उम्र में  ही उनकी कविताओं ने अनुभवों की निजता का परिचय दे दिया है, शबीह का पहला संकलन 'हमारी नयी ज़िंदगी ' 2006 में आ चुका है । शमीम हनफी और अरुण कमल ने इसकी भूमिका लिखी है। इस संकलन से इसी शीर्षक वाली कविता, यह नौ दस साल की उम्र में ही लिखी गई थी.................


चाँद की चाँदनी होती है
जो फूलों में जाकर सोती है
नन्हें बच्चों की आवाज़ कैसी होती है ?
चिड़ियों की चहचहाहट -सी होती है । 

फूल तो प्यारे होते हैं
उन्हें छूकर हवा बहती है
उनमें से कुछ पत्तियां बरसती हैं

उन्हीं कोमल फूल की पत्तियों से,
फूल जैसे बच्चों से 
धरती की पवित्रता से,
बहते झरने से,
चाँद-सितारों से, 
बरसते पानी की बूँदों से,
हमारे माँ - बाप से 
शुरू होती है हमारी नयी ज़िंदगी !
                                                 -शबीह राहत 

 

4 टिप्‍पणियां:

Jandunia ने कहा…

इस पोस्ट के लिेए साधुवाद

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत बढ़िया!!

निर्मला कपिला ने कहा…

बहुत बडिया शुभकामनायें

soni garg ने कहा…

Great poetry..........